नज़्मों की मलिका- शिखर सत्ता की विशेष रिर्पोट हेमलता त्रिपाठी

हेमलता त्रिपाठी

मीना कुमारी फिल्म और नज्मों के दीवानों के लिए भारतीय मनोरंजन जगत का सबसे प्रमुख नाम हैं. ऐसी अप्रतिम कलाकार और रचनाकार कोई दूसरी नहीं। भारतीय फिल्म जगत की सर्वाधिक पसंदीदा अभिनेत्री मीना कुमारी ने इंडस्ट्री में चार दशक तक एकछत्र राज किया. इनकी अधिकतर फिल्मों में ट्रेजडी की वजह से इन्हें बॉलीवुड की ट्रेजेडी क्वीन का खिताब दिया गया था. अपने जज्बातों को उन्होंने जिस तरह शायरी में कलमबंद किया उन्हें पढ़ कर ऐसा लगता है कि मानो कोई आपके ही दिल की सी बात कह रहा हो. गम के रिश्तों को उन्होंने जो जज्बाती शक्ल अपनी शायरी में दी, वह बहुत कम कलमकारों के बूते की बात होती है.

थका थका सा बदन/ आह! रूह बोझिल बोझिल/कहाँ पे हाथ से/ कुछ छूट गया याद नहीं….
कहते हैं कि शायरी दर्द से उपजती है। यह बात मीना जी पर खूब फिट बैठती है। उनके चरम पर होने तक के उनके अभिनय और लेखन की जानकारी रखने वाले लोग जानते हैं  कि वह कोई साधारण अभिनेत्री नहीं थी, उनके जीवन की त्रासदी, पीडा, और वो रहस्य जो उनकी शायरी में अक्सर झाँका करता था, वो उन सभी किरदारों में जो उन्होंने निभाया  भी. फिल्म “साहब बीबी और गुलाम” में छोटी बहु के किरदार को भला कौन भूल सकता है. “न जाओ सैया छुडाके बैयाँ…” गाती उस नायिका की छवि कभी जेहन से उतरती ही नहीं. यह कोई साधारण बात नहीं थी कि  १९६२ में मीना कुमारी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए तीन नामांकन मिले एक साथ. “साहब बीबी और गुलाम”, मैं चुप रहूंगी” और “आरती”.
कहते हैं कि मीना कुमारी का मुकाबला सिर्फ मीना कुमारी ही कर सकी. सुंदर चाँद सा नूरानी चेहरा और उस पर आवाज़ में ऐसा मादक दर्द, सचमुच एक दुर्लभ उपलब्धि का नाम था मीना कुमारी. इन्हें ट्रेजेडी क्वीन यानी दर्द की देवी जैसे खिताब दिए गए.प्रस्तुत है उनकी कुछ रचनाएं:

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होत़ा

जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता
हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँ न चुनें टुकड़े
हर शख़्स की क़िस्मत में इनआ’म नहीं होता
दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से
पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता
दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता।

….हँसी थमी है 

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह
तुम्हारा नाम है या आसमान नज़रों में
सिमट गया मेरी गुम-गश्ता ज़िंदगी की तरह
कोहर है धुँद धुआँ है वो जिस की शक्ल नहीं
कि दिल ये रूह से लिपटा है अजनबी की तरह
तुम्हारे हाथों की सरहद को पा के ठहरी हुईं
ख़लाएँ ज़िंदा रगों में हैं सनसनी की तरह।

..उदासियों ने

उदासियों ने मिरी आत्मा को घेरा है
रू पहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है
कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू
जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है
क़दम क़दम पे बगूलों को तोड़ते जाएँ
इधर से गुज़रेगा तू रास्ता ये तेरा है
उफ़ुक़ के पार जो देखी है रौशनी तुम ने
वो रौशनी है ख़ुदा जाने या अंधेरा है
सहर से शाम हुई शाम को ये रात मिली
हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है
ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम न बहलाओ
इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है।।

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