कांटों भरी डगर हो गई है पत्रकारिता

हेमलता त्रिपाठी
हेमलता त्रिपाठी

इस देश में पत्रकारिता का रास्ता बेहद घातक हो गया है। यह राह कांटों से भरी हुई है। इसमें पग पग पर खतरा है। आपकी जान की सुरक्षा तो बिल्कुल नहीं है। कब आप पर हमला हो जाए, कब आपको मौत के घाट उतार दिया जाए कुछ नही कहा जा सकता। रोज मीडिया में इस आशय की खबरें आती हैं कि फलां पत्रकार पर जानलेवा हमला, पत्रकार को जान से मारने की धमकी या पत्रकार को मौत के घाट उतार दिया गया आदि आदि।

बता दें कि मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक स्थानीय समाचार चैनल में काम करने वाले 35 वर्षीय संदीप शर्मा की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई थी। उनके परिवार ने दावा किया कि उनकी हत्या की गई थी। दरअसल, पत्रकार संदीप ने अवैध रेत खनन पर एक स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें उन्होंने रेत माफिया और पुलिस के गठजोड़ का भांडाफोड़ किया था। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद संदीप ने अपनी जान को खतरा भी बताया था पर प्रशासन ने उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। इस मामले में जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। दूसरी ओर, बिहार में दैनिक भास्कर के पत्रकार नवीन निश्चल भोजपुर जिले के आरा में एक वाहन द्वारा कुचले गए दो लोगों में शामिल थे। उनके परिवार ने भी आरोप लगाया है कि उनकी हत्या के पीछे गांव के पूर्व प्रधान का हाथ है। इसका मतलब यह है कि अगर आप सच लिखेंगे तो आपकी कलम को हमेशा हमेशा के लिए बन्द किया जा सकता है। आपकी हत्या भी की जा सकती है। यह पत्रकारिता में व्याप्त खतरे की प्रतीक है।
मध्यप्रदेश तथा बिहार में पत्रकारों की हत्या की इन घटनाओं को गंभीरता से समझें। इन दोनों पत्रकारों की हत्याओं पर देश विदेश में बेहद गंभीर प्रतिक्रिया हुई है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत में दो पत्रकारों की कथित हत्या और विश्वस्तर पर मीडियाकर्मियों के साथ हो रही हिंसा के प्रति चिंता जाहिर की है।
महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को कहा, ‘हम निश्चित तौर पर विश्व में कहीं भी पत्रकारों के खिलाफ हो रहे किसी भी तरह के उत्पीड़न और हिंसा को लेकर चिंतित हैं और इस मामले में भी हमारा रुख यही है।’
पत्रकारों की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकार के लिए काम करने वाली अमेरिकी संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने भी पत्रकारों के साथ घटित इन हत्याओं की निंदा की है और भारतीय अधिकारियों से कहा है कि वे हत्या के पीछे के मकसद का निर्धारण करें और शर्मा की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के साथ न्याय करें।
दिवंगत पत्रकार संदीप शर्मा के भांजे और सहकर्मी विकास पुरोहित, जो घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं, ने सीपीजे को बताया कि वे शर्मा को एक स्थानीय अस्पताल लेकर गए थे जहां शर्मा को मृत घोषित कर दिया गया था।
पुरोहित ने यह भी कहा कि, ‘ उन्हें और संदीप को अवैध रेत खनन और पुलिस के भ्रष्टाचार से संबंधित दो खबरें जुलाई और अक्टूबर 2017 में चलाने के बाद से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। विकास पुरोहित ने पुलिस थाने में अपनी शिकायत में सोमवार को बताया था कि संदीप शर्मा ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, भिण्ड पुलिस अधीक्षक एवं मानव अधिकार आयोग से कई बार आवेदन देकर रेत माफियाओं से अपनी जान को खतरा बताते हुये सुरक्षा की मांग की थी।
तो यह है आज की पत्रकारिता की हालत। आप सच्चाई के रास्ते पर चलेंगे तो आपको जान भी गंवानी पड़ सकती है। फिर पत्रकार क्या करे। क्या वह् सच लिखना छोड़ दे। क्या वह् सच दिखाना छोड़ दे। फिर पत्रकारीय गरिमा कहा रहेगी। इसलिए पत्रकारों को तो सच के ही रास्ते पर चलना है। एक जागरूक पत्रकार के रूप में मेरी सरकार से मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पत्रकार संदीप शर्मा की हत्या की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या उन्हें उनकी पत्रकारिता के चलते निशाना बनाया गया था। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना स्थानीय प्रशासन की असफलता है कि वे एक पत्रकार को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे सके जिसे जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। यही कदम सरकार को पत्रकार नवीन निश्चल के मामले में भी उठाना चाहिए और जल्दी उठाया जाना चाहिए।

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