एक ऐसा प्यार

हेमलता त्रिपाठी

यह बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ाई और अपने करियर के अलावा कुछ नहीं जानता था। मेरे मन मे सिर्फ यह बात थी कि खूब पढ़ना है आगे अपना करियर बनाना और माता पिता के सपने को पूरा करना है। मन में इसी सोच के साथ लखनऊ आ गया। लखनऊ में एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया और मन लगाकर पढ़ाई करने लगा।

उस कोचिंग इंस्टीट्यूट में लड़के और लड़कियां सब साथ में बैठते थे। एक दिन की बात है जब मैं क्लास में बैठा था तो एक लड़की जो हमेशा आगे बैठती थी, वह अपनी सीट छोड़कर आई और मेरे बगल में बैठ गई। “हाय, मेरा नाम प्रिया है। आपका क्या नाम है?” बातचीत की शुरुआत उसने ही की। “अमित”, मैंने संक्षिप्त सा उत्तर दिया और नजरें किताब के पन्नों में गड़ा लिया। मैंने नजर तो नीची कर ली पर उस लड़की की मीठी और प्यारी आवाज मेरे मन मे उतर चुकी थी। फिर उसने कुछ और सवाल किए जिसका उत्तर मैंने हां हूं में दिया। सच बताऊं तो तब तक मुझे पता नहीं था कि लड़कियों से कैसे बात की जाती है। तब उसने कहा, “अमित जी आप बहुत शर्मीले हैं।” “नहीं ऐसी कोई बात नहीं है प्रिया जी। मेरा मेरी पढाई में लगा हुआ था बस”। मैंने उससे कहा।
यह मेरी प्रिया से बातचीत की शुरुआत थी। उस दौरान मैं एक दिन देवा शरीफ गया। वहाँ पर पता नहीं मेरे मन मे क्या आया कि मैंने एक लाकेट खरीदा। वापस आने पर मैंने प्रिया से कहा के सुनो प्रिया ये लाकेट मैं तुम्हारे लिए देवा शरीफ से लाया हूँ इसको पहन लो। उसने कहा “थैक्यू अमित। आप मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं।” उस समय पहली बार प्रिया से कायदे से बात हुई। फिर क्या था। हम दोनों रोज साथ ही क्लास में बैठ कर पढ़ने लगे। पर मैंने यह महसूस किया कि प्रिया भले मेरे साथ बैठती थी, पर वह मेरे क्लासमेट रोहित से  सवाल पूछती थी मुझसे नही पूछती थी। इससे पता नहीं क्यों मुझे जलन होती थी। आखिर क्यों प्रिया मेरे से सवाल नही पूछती थी। एक दिन मैं ड्राईंग बना रहा था। तभी वह् आकर बोली, “वाव क्या ड्राईंग हैं। आर्ट है। अमित जी आप तो बड़े आर्टिस्ट हो।” मैंने बोला, “क्या तुम्हारे लिए भी ऐसी ड्राइंग बना दूं।’ उसने कहा, “जरूर।” फिर वहीं पर मैंने प्रिया से नंबर लिया। फिर धीरे धीरे हमारे बीच बात होने लगी। वाट्सऐप पर हाय हलो, मैसेजबाजी होने लगी। पूरी क्लास को पता चल गया कि मेरे और प्रिया के बीच रेगुलर बातचीत होती है।
फिर धीरे धीरे मैं उससे रोज बात करने लगा। साथ साथ पढ़ना लिखना सब कुछ चालू हो गया। थोड़ा बहुत घूमना फिरना भी। मैं प्रिया से प्रभावित हो गया। मैं उसको मन ही मन में पसन्द करने लगा। वो भी मुझे पसंद करने लगी। पर मैं अपने दिल की बात जबान पर लाने से डरता था। उन दिनों मैं प्रिया के बिना बेचैन रहने लगा। रात रात भर उसके बारे में सोचता रहता। हम लोग मिलने पर खूब बातें करते। दुनिया जहान की बातें। पर जैसे ही वह् अलग होती मैं उसके बारे में सोचता रहता।
मेरी यह हालत क्यों हो रही है? आखिर क्यों प्रिया के अलावा मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता? क्या यही प्यार है? क्या इसी को इश्क, मोहब्बत, चाहत कहते हैं? उन दिनों मैं यही सोचता रहता। आखिरकार मैंने फैसला कर ही लिया कि मुझे प्रिया से मोहब्बत का इजहार कर ही देना है।
प्रिया से लगातार बातचीत का, मुलाकात का सिलसिला चलता रहा। मैंने मन में पक्का सोच लिया था कि मुझे प्रिया से अपने दिल की बात कह ही देनी है। फिर एक दिन मैंने उससे कापी मांगी। मैंने सोचा था कि इस कॉपी में लव लेटर लिखकर रख दूंगा पर मेरी हिम्मत नहीं पड़ी।
फिर एक दिन मेरे दोस्तों ने मुझसे मेरा मोबाइल छीन लिया और उसके वाट्सऐप पर उसको “आई लव यू” मैसेज लिखकर भेज दिया, फिर मेरा वही से प्यार का इजहार चालू हो गया। प्रिया ने तुरन्त मैसेज का जवाब “आई लव यू टू अमित” से दिया। फिर एक दूसरे के साथ हम रोज मिलने लगे उसके बिना मेरा मन नही लगता था।
कुछ दिनों बाद प्रिया का जन्मदिन आने वाला था। बर्थडे गिफ्ट के रूप में मैंने उसको एक जूता दिलाया, स्वेटर दिलाया। हमने साथ मे खाना खाया। वहां पर उससे ढेर सारी बातें हुईं। वहीं उसने अपने सपने, संघर्ष की चर्चा की। उसकी कहानी सुनकर मेरी आँख नम हो गई। उसी समय मैने पक्का फैसला किया कि ‘प्रिया का साथ कभी नहीं छोडूंगा।’ तब मैंने उसको पैसे देना, हर तरह से उसकी मदद करना चालू कर दिया। हम दोनों के बीच प्यार बढ़ता चला गया। हमने साथ जीने मरने की कसमें खाई। फिर मैं उसको बहुत ज्यादा प्यार करने लगा और वो भी मुझसे बेइंतिहा मोहब्बत करने लगी। ठीक उसी  समय एक और लड़की मेरे जीवन मे आने की कोशिश करने लगी। पर तब तक तो मैं प्रिया को ही अपनी मंजिल मान चुका था। मेरे मन प्राण में प्रिया बस चुकी थी। फिर किसी और के प्रति आकर्षित होने का कोई सवाल ही नहीं था। उस लड़की रागिनी ने कोशिश तो बहुत की। कई बार उसने खुले रूप में कहा भी ‘आपसे प्यार करने लगी हूं।’ पर मैने साफ साफ मना कर दिया। दरअसल, मैं प्रिया के अलावा अपने दिल मे किसी अन्य की कल्पना ही नहीं कर सकता था। बहरहाल, मेरी जिंदगी प्रिया के इर्दगिर्द घूमने लगी। प्रिया के बिना मैं अपने को अधूरा महसूस करने लगा। मैं उसकी पूरा मदद करता था। और उससे हमदर्दी रखता था। तकरीबन 2 साल तक हम दोनों प्यार की दुनिया मे डूबे रहे। उस दौरान दोनों ही सातवें आसमान पर थे। “यादों की महफ़िल में तेरे सिवा न कोई, दीदार जिसका चाहूं, या इंतजार करना। सौ सौ जन्म तुम्हारे ही प्यार में कटे हैं, सौ सौ जन्म हमारे ही पास यार रहना।”
“प्यार पत्थर है इसकी चाह न कर, दिल ही टूटेगा ये गुनाह न कर। अपने अंदर न रख जलन कोई, चुपके चुपके ये आत्मदाह बन कर। कितने मतलब लगाएगी दुनिया, दिल भी टूटे अगर तो आह न कर।” गुजरते वक्त के साथ प्रिया के दिल मे क्या आया मैं नहीं जानता। पर मेरी दुनिया जरूर बिखरने लगी। आप इसे चाहे जो समझिये पर मैं प्रिया से जुनून की हद तक प्यार करता था। मैं उससे किसी और से बातें करते हुए नहीं देख सकता था। पर अचानक उसके जीवन मे रवि आ गया। रवि अच्छा लड़का है। प्रिया के एकदम योग्य। पर जब मुझे यह पता चला तो मुझे धक्का पहुंचा और मैंने उससे कहा, “प्रिया, मैं तुम्हे किसी और से बात करते हुए नही देख सकता। मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।” इस पर उसने कहा कि, “अमित, मेरा भरोसा करो। रवि से मेरा परिचय हुआ है बस। मेरा प्यार तो तुम हो, और कोई नहीं।”फिर वो मुझसे प्यार की भीख मांगने लगी थी। “पर प्रिया, मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगता था कि तुम रवि से बात करो। मुझे बहुत तकलीफ होती है।” इसी तरह की तकलीफ तब भी होती थी जब ये अपने जीजा से बात करती थी। तब भी मुझे खूब जलन होती थी।
प्रिया के जीवन मे रवि के आने बाद मैंने हालात से समझौता कर लिया। मन तो नहीं माना। लेकिन करना पड़ा। मजबूरन। अब मुझे कोई तकलीफ नही है।
एक जनवरी को न्यू ईयर पर प्रिया ने मुझे गुलाब दिया। पर तब तक मेरी तरफ से प्रिया और मेरा रिश्ता बदल चुका था। इसलिए मैंने प्रिया का गुलाब स्वीकार नहीं किया। मैं बोला अब मुझे तुमसे गुलाब नही चाहिये। इस पर रवि का हक है। प्रिया सिर झुकाए बोली, अमित अब हम दोस्ती के रिश्ते में आ जाएं और आज से एक नए रिश्ते की शुरुआत करें।
प्यार हो या दोस्ती मैं जीवन भर के रिश्ते में यकीन रखता हूँ। एक बार हाथ थाम लिया तो थाम लिया। फिर पीछे हटने का सवाल ही नहीं। मुझे पहले के दिन याद आते हैं। जब प्रिया अपने घर से लखनऊ आती थी तो मैं उसे बस स्टैंड तक लेने जाता था। उसके पूरे खर्चे उठाता था। कपड़े से लेकर हॉस्टल का पैसा देना, पिक्चर, किताबें, खाना सब मैं करता था लेकिन पता नहीं क्यों उसके जीवन मे रवि आ गया। वो दूसरे से प्यार करने लगी। लेकिन अब मेरे और पूजा के बीच में प्यार, मोहब्बत जैसा कुछ भी नही है। हम दोस्त हैं। सिर्फ दोस्त। प्रिया जब रवि से बात कर रही होती थी तो मैं जुनून की हद तक 40-50 फोन कर डालता था। तब वह् फोन बंद कर देती थी। इसके बावजूद प्रिया अब भी दोस्त के रूप में मेरी जिंदगी में है।
उसके बहुत रिक्वेस्ट के बाद मैं उसके साथ एक बार मॉल चला गया हूँ। मैं आपको एक राज की बात बताऊं, अब मेरे जीवन मे एक लड़की और आ गई है। उस लड़की के साथ मैं और प्रिया काफी देर तक साथ रहे। अभी मेरा प्रिया का रिश्ता खत्म नही हुआ है। मैं आज भी अपनी गर्ल फ्रेंड की चोरी उसको मिलने जाता हूँ। और शॉपिंग करवाने के लिए ले जाता हूँ। प्रिया को मूवी दिखाने ले के जाता हूँ। उसको जो भी जरूरत होती है मैं उसके लिए करता हूँ। इन सबका मेरी गर्ल फ्रेंड को पता भी नही चलता। मैं उससे उसके लिए लड़ जाता हूँ। यूं समझिए कि प्रिया मेरा पहला प्यार है और पहले प्यार को भूला नहीं जा सकता। मेरे मन मे प्रिया के प्रति प्यार का अंश कुछ है इसलिए मैं चाहता हूँ वो कुछ बन जाये इसलिए मैं उसका पूरा खर्च वहन करता हूँ। आज भी मैं उससे रोज चुपके से मिलता हूँ। मैं आपको बताऊं कि मैं अपनी उस गर्लफ्रेंड को छोड़ सकता हूँ पर प्रिया को नही। प्रिया मेरी जान है। ये रिश्ता जीवन भर रहेगा। आगे तक चलता रहेगा।

Comments

comments

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com