2025 की एक शोकसभा

राजेश विक्रांत

2025 की एक शोकसभा –  व्यंग्य

आज का दिन हम सबके लिए बहुत दुख का दिन है। गम का दिन है। अपूरणीय क्षति का दिन है। उनके जाने से इतना बड़ा गड्ढा बन गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। आज कुछ ही घण्टे पहले माननीय श्री ऑनलाइन वल्द पोस्ट प्रसाद वीर गति को प्राप्त हुए हैं।
मरने वाला बहुत ही अच्छा इंसान था। अपने नाम के मुताबिक हमेशा ऑनलाइन रहता था और अपने पूज्य पिता का नाम रोशन करने के लिए सदैव पोस्ट करता रहता था। इन पर डिजिटल इंडिया का इतना भयंकर प्रभाव था कि एक बार लूज मोशन की तकलीफ की वजह से जब ये डॉक्टर के पास पहुंचे तो अपनी समस्या इन शब्दों में बताई,” डॉक्टर साहब सवेरे से अनलिमिटेड फ्री आउटगोइंग के साथ न्यू रिंगटोन भी शुरू हो गई है। मेरे पेट में जीरो बैलेंस है। अगर मैं रिचार्ज भी करवाता हूँ तो महज एक मिनट के भीतर ही बैलेंस जीरो हो जाता है। सर आप इस ऑफर को डिस्कनेक्ट करने की कृपा कीजिए।
इसकी पोस्ट बड़ी जानदार हुआ करती थी। यूँ समझिए कि कि उन्हें पोस्ट, टैग, कमेंट, शेयर, टैग, फोटो ऐड करने, इनवाइट करने, पेज क्रिएट करने का भयंकर जूनून था। वह हर एक की रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेता था। उन्होंने कभी अपने कमेंट से किसी को तकलीफ नहीं दिया।
बड़े दिल का मालिक था। कभी किसी को ब्लॉक नहीं किया। दोस्तों की सेल्फी दिल खोलकर लाइक करता था। अमीरो से शेयर और गरीबो को टैग किया करता था।
मान्यवर चारों तरफ से शेयर, फारवर्ड, कमेंट, पोस्ट, चैटिंग, लाइक, फ्रेंड रिक्वेस्ट, फॉलो, लाइक, पोस्ट से भरे संसार के कीचड़ में कमल समान थे। कमल की सारी विशेषताएं, समस्त गुण उनमें इतने कूट कूट कर भरे हुए थे कि हम सरीखी अकमल बिरादरी कभी कभी उनके असली नाम को भूल कर उन्हें कमल प्रसाद कह देती थी। पर ऑनलाइन दुनिया अनफ्रेंड और ब्लॉक रूपी कीचड़ का अपना एक अलग साम्राज्य होता है। उसने हमारे कमल जी को कई बार गन्दा करने की कोशिश भी की। लेकिन हमारे कमल जी अपनी सारी कमलता के साथ दुष्ट कीचड़ को उसकी सही जगह दिखाते रहे। इसमें उनके ख़ास गुणों सनक, रूचि, अरुचि, बेवकूफियों, गलतफहमियों, असुरक्षा की भावनाओं व संदेहों की अच्छी खासी भूमिका रही। वे दरअसल, निरर्थक वार्ताओं, थोथी चर्चाओं, व्यर्थ चैटिंग, फ़ालतू बातचीत, अर्थहीन कमेंट, दिशाहीन बातों तथा निराधार पोस्टों के बादशाह थे। जैसा ऑनलाइनर वैसा कमेंट करने के विशेषज्ञ।
ऑनलाइन से इतर दुनिया में भी मरहूम इतने टैलेंटेड थे किसी भी मॉडल की गाड़ी को सिर्फ एक बार हिला के बता देते थे कि गाड़ी में पेट्रोल कितना है। वे सबसे ज्यादा तब खुश होते थे, जब रेलवे फाटक बंद हो रहा हो और उसके पहले वो अपनी गाडी निकाल दें तब उन्हें ओलम्पिक रेस जीतने वाली फीलिंग होती थी।
मरहूम की पल पल डीपी परिवर्तन और सेल्फी हैबिट की आदत तो रिकार्ड बुंक में शामिल करने लायक रही। उनकी डी पी उनके तरह ही होती थी। जलेबी की तरह। शरलॉक होम्स सीरीज के नॉवेल की तरह। परम रहस्यपूर्ण। उनके गोलाकार मुंह और गालों पर एक परमानेंट अबूझ भाव हमेशा बना रहता था। हर तस्वीर में। इससे यह बहुत मुश्किल से मालूम पड़ता था कि वे खुश हैं, गुस्से में हैं, चिंतन की मुद्रा में हैं, किसी बात पर मनन कर रहे हैं या कुछ मादक द्रव्यों का उन्होंने एक साथ सेवन किया है। उनकी सेल्फी तो हमेशा ऑनलाइन पर वायरल रहती थी। हर प्रकार के क्रम, काम और शंकाओं चाहे वह लघु शंका हो या दीर्घ शंका की क्रियाओं की सेल्फी वे पोस्ट करने की कला में आजीवन माहिर रहे। अब हमें दुःख है यह अद्भुत कला उनके साथ ही लुप्त हो गई।
मरहूम का स्मार्टफोन विभिन्न प्रकार के ऐप का विशाल गोदाम था। मैसेंजर, इंस्टाग्राम, ट्विटर, फेसबुक, मोमेंट्स, हवाट्स ऐप, स्काइप, आई एम ओ, हाइक, शेयर इट, ट्रूकॉलर से लेकर फ्लिपकार्ट, पावर पाइंट, हैंग आउट, स्मार्ट मैनेजर, फोटो एडिटर, यू ट्यूब, मैक्स प्लेयर तक से उनका फोन सुसज्जित था। इसलिए भले शारीरिक स्फूर्ति का अभाव रहे। भले ही मानसिक व्यग्रता का योग बने भले ही एम बी, धन, इज्जत और कीर्ति की हानि हो जाए। भले ही वे किसी नए कार्य का प्रारंभ न कर पाएं।  भले ही निजी पत्नी समेत समस्त परिवारजनों के साथ मनमुटाव की वजह से घर में हमेशा कोतवाली का माहौल बना रहे। भले ही कार्यालय में तथा व्यावसायिक स्थल पर उनकी प्रतिष्ठा का ग्राफ नीचे जाता रहे। भले ही गृहस्थजीवन में आनंद का वातावरण गुप्त हो जाए। या फिर शारीरिक कष्ट के योग न सामने आ जाए। अथवा भले ही कोर्ट-कचहरी के मामले में लिप्त हो जाएं पर मजाल है कि कभी मरहूम ने हमेशा ऑनलाइन का अपना धर्म त्याग दिया हो।
अपने महाप्रयाण को भी मरहूम ने एक अविस्मरणीय इवेंट बना दिया।जब उनकी चला चली की बेला आयी तब भी फेसबुक वे पर ही विराजमान थे। अचानक नेटवर्क के सिगनल उडे। जीवन का टावर बर्स्ट हुआ और उनके समस्त सिगनल भी उड जाने के कारण उनकी आत्मा का कनेक्शन तत्काल परमात्मा से हो गया। वे बहुत ही बढ़िया आदमी थे।

Comments

comments

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com