मनोरंजन

2025 की एक शोकसभा

2025 की एक शोकसभा –  व्यंग्य आज का दिन हम सबके लिए बहुत दुख का दिन है। गम का दिन है। अपूरणीय क्षति का दिन है। उनके जाने से इतना बड़ा गड्ढा बन गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। आज कुछ ही घण्टे पहले माननीय श्री ऑनलाइन वल्द पोस्ट …

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चुनौती भरा पेशा है पत्रकारिता

मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी का एक शेर है, खींचो न कमानों से तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो अखबार निकालो। यानी कि छपे हुए शब्दों की ताकत सबसे बड़ी होती है। यह तीर कमान, तलवार तोप से ज्यादा मारक होता है। यह बात आज इक्कीसवीं सदी में भी सत्य है। …

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एक ऐसा प्यार

यह बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ाई और अपने करियर के अलावा कुछ नहीं जानता था। मेरे मन मे सिर्फ यह बात थी कि खूब पढ़ना है आगे अपना करियर बनाना और माता पिता के सपने को पूरा करना है। मन में इसी सोच के साथ लखनऊ आ …

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समाज का वास्तविक विकास तब?

कल बाजार में शॉपिंग करते समय शालिनी मिल गई। मेरी पुरानी सहेली। इंटर में हम दोनों साथ पढ़े थे। फिर बिछुड़ गए। मुलाकात नहीं हुई। तकरीबन दस साल बाद मिली थी। हम दोनों के पास कहने सुनने को बहुत कुछ था। सो खरीदारी के बाद एक होटल में बैठ गए। …

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तुम मेरे हो-कहानी- हेमलता त्रिपाठी

कहते हैं कि जिंदगी में बहुत ज्यादा मित्रों, शुभचिंतकों की जरूरत होती नहीं। सिर्फ एक कायदे का मिल जाए बस आप उसके सहारे जीवन के सारे उतार चढावों का सामना कर सकते हैं। जीवन में आने वाली सारी तकलीफों, दुखों में भी सुख महसूस कर सकते हैं। खासकर तब जब …

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भुला न पाया-मो.शकील की गजल

भुला न पाया भूला खुदा को अपने पर तुझको भुला न पाया, क्या तेरी आरजू थी, जो मैं समझ न पाया। बस याद में तेरी मैं, आंहें हूँ भर रहा, पाने को मैं तुझे सजदा हूँ कर रहा, क्या तेरी जुस्तुजू थी जो मैं न जान पाया, भुला खुदा को …

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क्या फायदा- मो.शकील की गजल

क्या फायदा ऐ कली तू बता क्यों उदासी तुझे, गर तू न खिले, तो है क्या फायदा। बाद मरने के चाहत, हो जाएगी गैरत, चाहतों को छुपाने से है क्या फायदा। बेसबब ऐ कली, पंखुड़ी पे क्यों अश्क रोके, दिल को दुखाने से है क्या फायदा। ऐ कली अलबेली, तू …

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जी उठा तुलसी का पौधा-लेखिका-सुनीता माहेश्वरी

“बन्नो तेरी अँखियाँ सुरमे दानी, बन्नो तेरा टीका लाख का रे……” | शुभदा बड़ी तन्मयता से गाते हुए, गहने पहन कर शीशे में देख रही थी | तभी उसके पति शरद सिंह आए और उसकी कमर में हाथ डालते हुए बड़े प्यार से बोले – “अरे वाह ! आज तो …

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“नारी तेरी कैसी लीला?”- ममता यादव

“नारी तेरी कैसी लीला ?“ नारी तेरी कैसी लीला, सहनशीलता से तेरा अन्तर्मन सजीला। निशा से रजनी तक तेरा कृतित्व, धूल के कण सा तेरा अस्तित्व। रिश्ते – नाते का तू करती सम्मान, भूलाकर अपने सारे अरमान। देती है केवल तू ही सारे बलिदान, तो फिर ये भारत क्यों बना पुरुष …

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आपका चेहरा- मैं अकेली- ऐ मुस्कुराहट – अखबार बिक गए – राधा का प्रेम अनोखा था – हेमलता त्रिपाठी की कविताएं

आपका चेहरा आपका चेहरा है या खिलता हुआ गुलाब, आपकी मासूमियत को क्या कहें इसका नही है जबाब। जितना भी देखूं आपको नजरों में आप समाते नहीं, जी भर के देख लूं आपको रोज ऐसे लम्हें आते नहीं। यह बेखयाली और यह बेपरवाह निगाहें, आपका आलिंगन और समर्पित सी बाहें। …

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