साहित्य

सीरियल ‘राधाकृष्ण’ में नज़र आ रहे धनबाद के आलोक शर्मा: 

आलोक शर्मा को बचपन से ही अभीनय का शौक था किंतु बचपन में वो माहौल नहीं मिल पाया और ये थोड़े शर्मीले भी थे। बिहार के नवादा में जन्में तथा धनबाद में पले-बढ़े आलोक शर्मा पिछले कई सालों से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे थे। आलोक के पिता का …

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अमेठी में सवर्ण संगठनो ने भरी हुंकार

अमेठी में सवर्ण संगठनो ने भरी हुंकार अमेठी । 6 सितम्बर 2018 दिन वृहस्पतिवार को जनपद के सवर्ण संगठनो ने SC/ST एक्ट के संशोधन क़ानून के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का समर्थन किया। जनपद मुख्यालय गौरीगंज में दोपहर को भारी संख्या में प्रबुद्ध समाज संगठन के लोग सरकार …

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महागठबंधन की राजनीति में हसीन सपने और विकृत बयानबाजी

महागठबंधन की राजनीति में हसीन सपने और विकृत बयानबाजी मृत्युंजय दीक्षित अभी लोकसभा चुनाव होने में काफी समय है लेकिन प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी की रैलियोंं औेर उनकी जनसभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ को देखकर राजनैतिक विश्लेषक जहां अपना अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं। वहीं विरोधी दले में …

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किसानों की सुधि लीजिए

हमारे अन्नदाता किसान की असली हालत क्या है इसे अमेठी की एक घटना से समझा जा सकता है। जहाँ तीन दिन से अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक किसान ने अनाज मंडी में ही  दम तोड़ दिया। जो किसान हाड़तोड़ मेहनत करके हमारे लिए अन्न उगाता है। अपने खेतों …

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अरे बाप रे, यहां भी सेक्स स्कैंडल

चाहे वह् नेशनल पुरस्कार हो या कोई इंटरनेशनल पर अगर विवाद न हों तो कैसे पुरस्कार? पुरस्कारों की आम दुनिया में पक्षपात, राजनीति, भाई भतीजावाद, अनैतिकता तो बेहद आम बात है पर यह सब छोटे पुरस्कारों में ज्यादा सुना जाता था। बड़े और प्रतिष्ठित पुरस्कारों में इस तरह का ओछापन …

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रिया-कहानी

‘मम्मा, आप पिछले कुछ दिनों से खोई खोई सी क्यों रहती हो?’ ‘नहीं बेटा, ऐसी कोई बात नहीं है।’ बिटिया के सवाल से मेरी तन्द्रा टूटी। ‘नहीं मम्मा, कुछ बात तो है।’ ‘नहीं बेटा कुछ नहीं।’ ‘मम्मा मुझे बताओ न। मैं अब छोटी बच्ची नहीं हूं। बड़ी हो गई हूं। …

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सहपाठी

अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं. मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन.’ ‘अब अभी कौन फोन कर सकता है भला! ‘ मोहित का ठीक साढ़े नौ बज़े दफ़्तर जाने का नियम रहा …

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“आखिरी गेंद”

“आज शुक्रवार है। सुनहरी तेज धूप खिली है। पन्द्रह दिनों से भीषण शीतलहर और हफ़्ते भर से रुक रुक कर हल्की बौछारें पड़ने, ओले गिरने से ठिठुरन और गलन के कारण जन- जीवन बुरी तरह प्रभावित हो ठप- सा पड़ गया था। कहीं भी आना- जाना दूभर हो गया था। …

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कब सुधरेंगे नराधम?

ये नराधम कभी नहीं सुधरेंगे। कभी नहीं। बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों की संख्या में कमी आने की संभावना कोई नहीं दिखती। कोई भी मामला सामने आने पर बड़े बड़े बयान दिए जाते हैं। बलात्कारियों की लानत मलामत की जाती है। हाय हाय मुर्दाबाद की जाती है। सरकार दावे करती है। …

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2025 की एक शोकसभा

2025 की एक शोकसभा –  व्यंग्य आज का दिन हम सबके लिए बहुत दुख का दिन है। गम का दिन है। अपूरणीय क्षति का दिन है। उनके जाने से इतना बड़ा गड्ढा बन गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। आज कुछ ही घण्टे पहले माननीय श्री ऑनलाइन वल्द पोस्ट …

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